Happy new year 2018 text massages

Yeah….!!

Countdown has begun 
…. and Turning 18

❤️Feels Gooooood

Feels Younger ?

?Feels Beautiful 

Feels Romantic ?

?Feels Amazing 

Feels Awesome ?

?Feels Majestic 
just be ready to Feel 

and Touch me soon..!!!
Your \’s Best-ever

❤️2018? 

Dear 2017??

Run Fast

Run A Little Faster

.

.

.

.

2018

is waiting at the finish line 

to start 

?NEW ADVENTURES ?

?NEW CHANCES?

☘️NEW FORTUNE☘️

?NEW ENDEAVOUR ?

?☘️???????

Gentle Good by to 2017
Closing of 2017

Is such an interesting 

Time of Reflection..!!!

….. and it\’s a combination of 

☘️Satisfactions

Wonders☘️

☘️Overwhelm 

Gratitude ☘️

☘️Incompletion 

Beauty ?

☘️Love and 

Anticipation all at once..!!!
Now Be Ready to say…

Passionate Welcome to 2018

❤️????????❤️

How to creat education apps on Android

In this i am going to tell you that how can we creat education apps from home.

Education is most important part of life. Day by day education goes with technology soo everyone can learn from it.

What you need for creat android apps

  1. A Windows or mac laptop
  2. Some basic knowledge of coding
  3. A Google doveloper account
  4. Or time 

If you have all those things then you are ready to make aaps.

In next post i will tell more tips for creat apps

jinkaa man padhai study me nahi lagta

Ye post un baccho or bado ke liye h jinkaa man padhai study me nahi lagta. Ya jinko padh na likhna ek problom lagta h. Ye post fb Master sanjay sinha ji ki profile se li gayi h. App bhi unhe vnha follow kar sakte hai. Plz isse dhyan se padhe or bade or baccho ke sath share karen.
मेरी आज की कहानी बड़ों से ज्यादा बच्चों के लिए है। अब बच्चे तो मेरे दोस्त हैं नहीं, तो बच्चों के पापाओं और बच्चों की मम्मियों से मैं अनुरोध करूंगा कि मेरी आज की पोस्ट वो अपने बच्चों को ज़रूर सुनाएं।
कल मैं दिल्ली के एक बड़े शॉपिंग मॉल में गया। वहां मुझे एक दुकान में स्टोर मैनेजर से मिलना था। मैंने दुकान में खड़े सिक्योरिटी गार्ड से पूछा कि स्टोर मैनेजर कहां मिलेंगे। गार्ड मुझे अपने साथ मैनेजर के केबिन तक लेकर गया। वहां मुझे कमरे में एक दुबला-पतला युवक बैठा दिखा। उसने मोटा सा चश्मा लगा रखा था। गार्ड ने मुझे दूर से दिखाया कि यही मैनेजर हैं।
मैं मैनेजर के पास गया। मुझे उससे उसके स्टोर से खरीदे किसी सामान की शिकायत करनी थी।
मैनेजर ने ध्यान से मेरी बात सुनी और उसने मुझसे बैठने का इशारा किया और कहा कि वो इस सामान के विषय में किसी से फोन पर बात करके अभी लौट कर आ रहा है।
मैं मैनेजर का इंतज़ार करने लगा। संजय सिन्हा मैनेजर का इंतज़ार करने लगें, ये कितनी देर तक मुमकिन रहता?
मिनट भर बाद ही मुझे लगने लगा कि बहुत देर हो गई है।
कुछ पत्रकारों को छोटे लोगों पर रौब दिखाने की बुरी बीमारी हो जाती है। मुझे कल पता चला कि मैं भी इससे अछूता नहीं। एक मिनट बाद ही मुझे लगने लगा कि एक घंटा बीत गया है। मुझ जैसे पत्रकार को तो बड़े-बड़े नेता और अभिनेता भी इंतज़ार करने के लिए नहीं कहते, फिर ये अदना सा स्टोर मैनेजर मुझसे कह गया कि आप यहां बैठ कर इंतज़ार कीजिए!
***
मैं मैनेजर के कमरे से बाहर निकल आया, तो मैंने देखा कि वो छह फीट का गार्ड वहीं बाहर खड़ा है। अपनी आदत के मुताबिक मैं गार्ड से बात करने लगा।
“ये तुम्हारा मैनेजर कहां गया?”
“साहब, वो उस डिपार्टमेंट में गए हैं, जहां से आपने सामान लिया था।”
“ये मरियल सा चश्माधारी जानता नहीं कि मैं किसी का इंतज़ार नहीं करता। मैं सामान वापस करने आया था, फटाफट वापस करना चाहिए था।”
“पर साहब, सामान वापसी का नियम यही है। उस डिपार्टमेंट में उसके विषय में रिपोर्ट लिखानी पड़ती है। मैनेजर उनसे जवाब-तलब करते हैं कि गड़बड़ी क्यों हुई। फिर वो वाउचर पर साइन करके आपको दे देंगे।”
पत्रकारों को एक बीमारी बेवजह बात खींचने की भी होती है। मैं भी लगा रहा उस गार्ड से।
“तुम तो इतने हैंडसम हो। छह फीट के हो। तुम मैनेजर से डरते हो क्या?”
“साहब, मेरा हैंडसम होना, मेरा छह फीट का होना कोई मायने नहीं रखता। वो आदमी मुझसे अधिक पढ़ा लिखा है।”
“पढ़ा-लिखा है तो क्या हुआ, तुमसे ज़्यादा शक्तिशाली थोड़े न है?
“कैसी बातें करते हैं साहब! उसके पास कलम की ताकत है। यह तो आप भी जानते ही होंगे कि शरीर की ताकत से अधिक ताकत कलम में होती है।”
“फिर तुमने पढ़ाई क्यों नहीं की?”
“इस बात का तो ज़िंदगी भर अफसोस रहेगा। मां-बाप स्कूल भेजते थे, मैं ही स्कूल से भाग कर खेलने निकल जाता था। मां-बाप ने गांव में टीचर को घर बुला कर भी पढ़ाने की कोशिश की, पर अफसोस की मेरी किस्मत में पढ़ाई थी ही नहीं।”
अब मुझे लगने लगा कि मैंने बेकार में ये टॉपिक इस गार्ड से छेड़ दिया। उसे सांत्वना देने के लिए मैंने कहा कि गांव में पढ़ाई का माहौल भी तो नहीं होता। स्कूल-कॉलेज भी ठीक नहीं होते।
“नहीं साहब! ये सही बहाना नहीं है पढ़ाई न कर पाने के लिए। गांव में भी सरकार ने स्कूल खोले हैं। और तो और थोड़ी दूर ही शहर में कॉलेज भी है। नहीं पढ़ने के हज़ार बहाने होते हैं। मैं तो कहता हूं कि जो भी यह बहाना करता है कि उसे पढ़ने का मौका नहीं मिला, वो एकदम झूठ बोलता है। मैं यह तो मान सकता हूं कि शहर के स्कूलों में अलग टीचर होते होंगे, पर गांव में भी वही किताबें पढ़ाई जाती हैं। असल में पढ़ वही बच्चा सकता है, जिसके सामने पढ़ने की मजबूरी हो या फिर उसे पढ़ने का शौक हो।”
“तुम इतना समझदार हो, फिर तो तुम्हें पढ़ाई करनी चाहिए थी।”
“बस साहब इसी को किस्मत कहते हैं। ये जो मैनेजर है न! वो मेरे गांव का ही है। वो भी उसी स्कूल में पढ़ा है। बाद में ये आगे पढ़ाई के लिए शहर चला गया। पर अपने बूते पर गया। हम ढेर सारे बच्चे जो आज छह फीट के हैं, बचपन में इसका मज़ाक उड़ाया करते थे। जिस दिन स्कूल में मास्टर नहीं आते हम वहां से निकल कर दो मील दूर सिनेमा देखने पैदल चले जाते थे। ये पेड़ के नीचे बैठ कर कुछ-कुछ पढ़ता था। मेरे पिताजी के पास जमीन थी, इसके पास कुछ नहीं था। मुझे जमीन का घमंड था। पिताजी ने बहुत कोशिश की कि मैं पढ़ लूं। पर मैं नहीं पढ़ पाया। फिर पिताजी की बीमारी में जमीन बिक गई। मैं बेरोजगार बैठा था। गांव में कोई पूछने वाला नहीं था। बहुत दिनों बाद यही लड़का, जिसे आप मरियल कह रहे हैं, मुझसे मिलने आया। मैंने इससे अपनी तकलीफ साझा की। ये मुझे अपने साथ दिल्ली लेकर आया। मुझे किसी तरह यहां इसने नौकरी दिलाई। फिलहाल खर्चा-पानी चल रहा है।

साहब ये तो कहता है कि अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा, अभी भी प्राइवेट पढ़ाई पूरी करो। ये मुझे आज भी पढ़ने के लिए उकसाता है। इसने गांव के ढेर सारे बच्चों की, जो कुछ नहीं करते थे, अपनी तरफ से मदद की है। ये कहता है कि सरकार को कोसना बंद करो। लोगों पर हंसना बंद करो। पढ़ाई करो। नहीं तो एक दिन लोग तुम पर हंसेंगे, तुम्हें कोसेंगे।
साहब! मैं तो कहता हूं कि आप भी उन बच्चों को, जो बच्चे स्कूल से भाग कर यहां मॉल में शॉपिंग करते या सिनेमा देखते नज़र आएं, समझाइएगा कि आज की ये मस्ती कल तुम्हें भारी पड़ेगी।”
***
मैं हैरान होकर उस गार्ड की बातें सुनता रहा। सोचता रहा।
फिर मुझे लगा कि कुल दो मिनट में यह गार्ड मुझे कितनी बड़ी बात समझा गया।
“लोगों को कोसना बंद करो। लोगों पर हंसना बंद करो। पढ़ाई करो। नहीं तो एक दिन लोग तुम पर हंसेंगे, तुम्हें कोसेंगे।”
***
मैनेजर वापस आ चुका था। उसने मेरे पैसे रिफंड करने का वाउचर मुझे दिया। असुविधा के लिए स्टोर की ओर से मुझसे माफी मांगी। हाथ मिला कर चला गया।
taken from ‪#‎Rishtey‬ Sanjay Sinha fb wall

आरजेएस की मुख्य परीक्षा में आने वाले Criminal Minor Acts से सम्बंधित प्रश्न उत्तर

खण्ड-क
१. साईबर क्राईम को परिभाषित कीजिए ?
२. सूचना प्रोधौगिकी अधिनियम में मध्यस्थ कौन हैं?
३. साईबर अपीलीय अधीकरण में अपील की अवधि क्या हैं?
४. धारा 138 के अपराधों के विचारण के लिए कौन सक्षम हैं?
५. परिवीक्षा अधिकारी किसके नियन्त्रण के अधीन रहता हंै ?
६. किशोर या बालक के प्रति क्रुरता के लिए दण्ड बताईये?
७. किशोर न्याय (बालकों की देखरेख ओर संरक्षण अधिनियम) में किन किषारों का सम्मिलित किया घ्
८. विषेष न्यायालय क्या हैं और स्थापना कौन करता हैं?
९. क्या 360 सी.आर.पी.सी. का लाभ किया जा सकता हैंै?
१०. साईबर सुरक्षा क्या हैं?
११. सूचना प्रोधौगिकी अधिनियम में प्रेषिती कौन हैं?
१२. सूचना प्रोधौगिकी अधिनियम में प्रस्तुतकर्ता कौन हैं?
१३. धारा 138 के अपराधों के विचारण के लिए कौन सक्षम हैं?
१४. विनिमय पत्र क्या हैंैं?
१५. परिवीक्षा अधिनियम किन पर लागू नहीं ?

खण्ड ख

१. सूचना प्रोधौगिकी अधिनियम का उद्धेष्य क्या हैं?

२. परिवीक्षा अधिकारियों के कर्तव्य बताईये?
३. किषोर अधिनियम को सुुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार का क्या कर्तव्य हैं?

४. देखरेख व संरक्षण हेतु जरूरतमंद बालक से आप क्या समझते हैं?
५. एन. आई के मामले में साक्ष्य के विषेष नियम क्या हैंैं?
६. किशोर की जमानत संबंधी प्रावधान बताईये?
७. निष्काषन से आप क्या समझते हैंै?
८. भारतीय कम्प्युटर आपात प्रतिक्रिया दल, साईबर सुरक्षा के क्षेत्र में किन कार्यो को करेगी?
९. बाल कल्याण समिति के समक्ष कौन बच्चो को पेष करता हैं एवं उसकी क्या शक्तियां हैं?
१०. पुनर्वास और सामाजिक सुधार संबंधि प्रावधान के बारे में बताइयेघ्

खण्ड-ग
१. संप्रेक्षण गृह/विषेष गृह/बाल गृह के बारे में समझाईय
२. अधिनियम में वर्णित विभिन्न अपराध तथा दण्ड बताईये?
३. आई. टी. एक्ट, 2000 की मुख्य विषेषताएॅं तथा उद्धेष्य क्या हैंैं?
४. बाल कल्याण समिति क्या हैं, इसकी प्रक्रिया क्या हैं एवं इसकी शक्ति के बारे में बताईयें
५. चैकों के अनादरण संबंधी प्रावधानों का वर्णन किजिए