आज नहीं तो कल इस दुनिया से चले जाना है – सूफ़ी कथा

दो घोड़े होते हैं जो बरसों से एक दूसरे के साथ एक तांगा चला रहे होते हैं.. शुरुवात में दोनों में बहुत प्यार होता है मगर फिर धीरे धीरे एक घोड़े को दूसरे घोड़े से चिढ़ होने लगती है.. वो दूसरे घोड़े की हर बात में नुक्स निकालने लगता है.. कभी कहता है कि तुम तेज़ दौड़ते हो कभी धीरे, कभी उस से कहता है कि वो उसकी बात नहीं सुनता.. दूसरा घोड़ा इस घोड़े की हर बात मानने की कोशिश करता है मगर इस घोड़े के पास रोज़ कोई न कोई नई शिक़ायत होती है उसको लेकर

एक दिन दूसरा घोड़ा मर जाता है.. अब इस घोड़े को, जो हमेशा उस से शिकायत करता था, उसे बहुत धक्का लगता है.. उसे लगता है जैसे उसका सब कुछ ख़त्म हो गया.. वो बहुत उदास हो जाता है और अपने उलाहने और शिकायतें याद कर के ख़ूब रोता है.. अब उसे पता लगता है कि वो घोड़ा उसके जीवन मे क्या अहमियत रखता था

कुछ दिन बाद मालिक एक नया घोड़ा लाता है.. इस बार ये घोड़ा सोचता है कि अबकी बार वो इस घोड़े के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेगा और उस से दोस्ती बनाये रखेगा.. कुछ महीने सब ठीक चलता है मगर फिर धीरे धीरे इस घोड़े को इस नए घोड़े से फिर वैसे ही परेशानी शुरू हो जाती है.. वो फिर इस नए घोड़े को उसी तरह परेशान करने लगता है जैसे वो पुराने वाले को करता था.. मगर फिर उसे अपने इस व्यवहार का एहसास होता है और वो सोचता है कि कहीं वो फिर अपने इस नए दोस्त को अपने इस व्यवहार से खो न दे.. इस बात के लिए वो परेशान होकर अस्तबल के एक सबसे समझदार ज्ञानी गधे के सामने अपनी इस समस्या का ज़िक्र करता है

ज्ञानी गधा कहता है “यही क्या कम है कि तुम्हें इस बात का एहसास हुआ कि तुमसे ग़लती हो रही है.. लोग पूरी उम्र यही करते रहते हैं मगर उन्हें कभी इसका एहसास ही नहीं होता है.. इसलिए तुम्हारा इस बात को समझना ही सुधार की दिशा में पहला क़दम है.. अब सवाल ये आता है कि क्या तुम इस बात को सच मे सुधारना चाहते हो या फिर ऐसे ही मुझ से अपनी ग़लती सुना कर अपने अहंकार को पोषित करके ख़ुश हो जाना चाहते हो?”

घोड़ा आंख में आंसू भर कर कहता है कि उसे अपनी इस ग़लती को सच मे सुधारना है

गधा कहता है “ठीक है फिर.. अगर तुम चाहते हो कि आज के बाद तुम अपने किसी भी प्यारे के साथ ये व्यवहार न करो तो एक बात का हमेशा ध्यान रखना.. और इस बात का ध्यान तुमको सोते जागते, उठते बैठते हमेशा रखना, और वो ध्यान ये है कि जिस किसी के साथ भी तुम इस समय हो उसे आज नहीं तो कल इस दुनिया से चले जाना है.. और वो तो इस दुनिया से जाएगा ही साथ साथ तुम को भी यहां से चले जाना है.. तुम्हारा तांगा, तुम्हारा मालिक, तुम्हारा दूसरा साथी घोड़ा, सब से तुम्हें आज नहीं तो कल बिछड़ना ही है.. ये जो छूटने के भाव है इसे दिन रात ऐसे याद रखो कि ये तुम्हारे अवचेतन में बस जाए.. और जिस दिन ये भाव पूरी तरह तुम्हारे भीतर बैठ गया उस दिन के बाद तुमको इस दुनिया मे किसी से कोई शिकायत नहीं रहेगी.. सब के प्रति तुम्हारे भीतर सिर्फ़ प्रेम भाव ही होगा.. ध्यान रखना कि जीवन मे जब तुम किसी से बिछड़ते हो तो उस समय तुम सबसे प्रेमपूर्ण होते हो.. इसलिए ये बिछड़ने का ध्यान बना रहे हमेशा.. ये भाव तुम्हें दूसरों के प्रति नफ़रत से बचाएगा.. और इस भाव को साध लेने के बाद किसी एक दिन तुम इस भाव को भी समझ सकोगे कि अब तुम्हें उसकी तलाश करनी है जो तुमसे कभी न बिछड़ेगा”

ज्ञानी गधे की बात सुनकर घोड़े की आंखों में आंसू आ जाते हैं.. उसे अपना बिछड़ा हुवा साथी घोड़ा याद आता है.. और वो अपने नए साथी घोड़े को देखता है जिसमे उसे अपने पुराने साथी घोड़े की झलक दिखाई देती है.. वो अस्तबल और सारी चीज़ों को एक एक कर ऐसे देखता है जैसे कल ये सब उस से बिछड़ जाएंगे.. धीरे धीरे.. समय बीतने के साथ वो घोड़ा जीवन और इसके तमाम बंधनों और नफ़रतों से मुक्त होने लगता है

(सूफ़ी कथा)